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स्वतंत्र भारत की ताकत हैं शिक्षित, संवेदनशील और जिम्मेदार बेटियां : डॉ. सीमा शाही
बेटियां भारत के आने वाले कल की निर्माता : आशुतोष मिश्र
शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला मजबूत राष्ट्र की आधारशिला : डॉ. पूनम शुक्ला
एनसीसी-एनएसएस की उत्कृष्ट छात्राएं मेडल से सम्मानित
गोरखपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय एवं स्कूल ऑफ नर्सिंग के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, शहीदों को श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच तीन हजार से अधिक छात्राओं ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति में योगदान देने का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ. शिव शंकर शाही और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सीमा शाही ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद छात्राओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
डॉ. शिव शंकर शाही ने कहा कि देश को स्वतंत्रता असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, यातना और बलिदान के बाद मिली है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर राष्ट्र को विकसित और सशक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने छात्राओं से सोशल मीडिया की दुनिया से आगे बढ़कर तकनीकी रूप से दक्ष बनने का आह्वान किया। कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से जीवन का हिस्सा बन रही है, लेकिन इसका उपयोग विवेक और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
नर्सिंग छात्राओं को सेवा का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल मंदिर के समान है, रोगी भगवान और चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ उसके सेवक हैं। रोगी की सेवा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवीय दायित्व और साधना के रूप में लेना चाहिए।
डॉ. सीमा शाही ने कहा कि स्वतंत्र भारत की असली ताकत शिक्षित, संवेदनशील और जिम्मेदार बेटियां हैं। नर्सिंग सेवा में ज्ञान और दक्षता के साथ करुणा, संवेदना और धैर्य सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने छात्राओं से अपने ज्ञान का उपयोग समाज और देश की सेवा में करने का आह्वान किया।
महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्र ने कहा कि तिरंगे की छांव में खड़े होकर हमें उन असंख्य बलिदानों को स्मरण करना चाहिए, जिनके कारण आज हम स्वतंत्र भारत में अपने सपनों को चुन पा रहे हैं। आज बेटियों का संघर्ष अज्ञान, निराशा, असफलता के भय और उस सोच के खिलाफ है, जो उनकी क्षमताओं पर सवाल उठाती है।
उन्होंने कहा कि छात्राएं केवल अपने माता-पिता की उम्मीद नहीं, बल्कि भारत के आने वाले कल की निर्माता हैं। अपने सपनों को छोटा न करें। मोबाइल को अपना मालिक नहीं, साधन बनाएं और सामाजिक माध्यमों पर दूसरों की जिंदगी देखने के बजाय अपनी ऐसी पहचान बनाएं, जिस पर परिवार, संस्थान और देश गर्व करे। उन्होंने छात्राओं से अगले स्वतंत्रता दिवस तक कम से कम एक ऐसी उपलब्धि हासिल करने का संकल्प लेने को कहा, जिस पर उनके माता-पिता और शिक्षक गर्व कर सकें।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूनम शुक्ला ने शहीदों को नमन करते हुए महिला शिक्षा और सशक्तीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला मजबूत परिवार, सशक्त समाज और सक्षम राष्ट्र की आधारशिला है। बेटियां आज विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, सेना, खेल और अंतरिक्ष सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। छात्राओं को आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
स्कूल ऑफ नर्सिंग के प्रधानाचार्य प्रकाश सिंह चौधरी ने कहा कि नर्सिंग सेवा में देशभक्ति का सर्वोत्तम स्वरूप पीड़ित मानवता की निस्वार्थ सेवा है। अनुशासन, करुणा और समर्पण प्रत्येक भावी नर्स के जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए।
समारोह में एनसीसी, एनएसएस तथा अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य लोरिटा याकूब, उप प्राचार्य डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, अलका चौधरी, डॉ. शीला त्रिपाठी, डॉ. रेनू गौर, तृप्ति सिंह, अर्पिता त्रिपाठी, सरोज मिश्रा, डॉ. श्रुति त्रिपाठी, डॉ. कुमुद त्रिपाठी, डॉ. संगीता पांडेय, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा मिश्रा, सुगंधा सिंह, योगेश यादव, देवेंद्र चौधरी सहित महाविद्यालय एवं नर्सिंग संस्थान के शिक्षक-कर्मचारियों की सहभागिता रही।
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