फाइलेरिया की दवा से नहीं कोई नुकसान, 29 फरवरी तक जिले भर में चलेगा अभियान

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• 15.08 लाख लोग खा चुके हैं दवा, स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बने हैं फाइलेरिया बूथ
• डब्ल्यूएचओ व पीसीआई भी कर रहे हैं अभियान में सक्रिय सहयोग

केस एक- हरिओमनगर स्थित पॉश कॉलोनी में 18 फरवरी को फाइलेरिया की दवा खिलाने गई टीम को कॉलोनी के निजी सुरक्षाकर्मी ने कालोनी के गेट पर ही रोक दिया। टीम के कई बार समझाने पर भी वह नहीं माना तो टीम ने जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय से बात कराई। डॉ. पांडेय ने जब दवा का महत्व बताया तब कहीं जाकर सुरक्षाकर्मी तैयार हुआ और कॉलोनीवासियों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई।

केस दो- पिपराईच ब्लॉक के कर्महा गांव में 20 फरवरी को जब टीम दवा खिलाने पहुंची तो उस गांव के जोगिंदर और रामसजन ने दवा का सेवन करने से इनकार कर दिया। प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) के सोशल मोबलाइजर राजन गुप्ता और पिपराईच के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी संजय सिंह ने गांव पहुंच कर दोनों लोगों को समझाया। फोटो के जरिए फाइलेरिया की भयावहता बताई तो उनके साथ पूरा गांव दवा के सेवन के लिए तैयार हो गया।

गोरखपुर। ये दो मामले केवल बानगी भर हैं। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कैंपेन में जुटी टीम को इस भ्रांति के कारण कि फाइलेरिया की दवा रिएक्शन करती है, आए दिन प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके टीम अभियान के जरिये अधिकाधिक लोगों को जोड़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और पीसीआई के सक्रिय सहयोग और टीम के प्रयासों से जिले में 15.08 लाख लोग दवा का सेवन कर चुके हैं। 29 फरवरी तक आशा-आंगनबाड़ी की टीम घर-घर घूम कर दवा खिलाएंगी। डीएमओ का कहना है कि जिले में शहरी क्षेत्र में अभियान के सामने ग्रामीण क्षेत्रों के सापेक्ष ज्यादा चुनौती है। उन्होंने शहरी क्षेत्र के लोगों से अपील की कि अगर टीम जाए तो टीम का सहयोग करें और फाइलेरिया की दवा अवश्य खाएं। डीएमओ ने बताया कि शहर में 2.12 लाख लोग अब तक फाइलेरिया की दवा खा चुके हैं।

बीपी-शुगर के मरीज खा सकते हैं दवा
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि फाइलेरिया की दवा का सेवन 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर तौर से बीमार लोगों को नहीं करना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी बीमारियां इस श्रेणी में नहीं आती हैं और इसके मरीज दवा का सेवन कर सकते हैं।

ये लक्षण दिखें तो घबराने की बात नहीं

सीएमओ ने बताया कि अगर फाइलेरिया की दवा खाने से पेट दर्द, उल्टी, मितली, चक्कर आना, चकत्ते पड़ना और दिल तेज धड़कने जैसी समस्या होती है तो घबराए नहीं बल्कि यह फाइलेरिया होने का सबूत है। इसकी दवा आपके शरीर में फैले संक्रमण को पूरी तरह खत्म कर रही है।

दवा से कोई नुकसान नहीं-सीएमओ
सीएमओ ने आमजन से अपील की है कि सभी लोग निश्चिंत होकर फाइलेरिया रोधी दवा खाएं। इस दवा से कोई नुकसान नहीं होता है। इस दवा से परेशानी सिर्फ उन्हीं को होती है जिनके भीतर फाइलेरिया के वाहक माइक्रोफाइलेरिया मौजूद हैं और दवा के असर से उनका खात्मा होने लगता है। ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हर सीएचसी-पीएचसी पर रैपिड रिस्पांस टीम बनी हुई है जो फौरन मदद कर रही है।

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