सपाइयों ने तोड़ी धारा 144, नागरिकता बिल पर दी गिरफ्तारी

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गोरखपुर। नागरिकता संशोधन बिल को निरस्त करने समेत 18 सूत्रीय मांगों के समर्थन में समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर धारा 144 तोड़ दिया। नगर निगम परिसर के रानी लक्ष्मी बाई पार्क में सपाईयों का 11 बजे से शुरू धरना पुलिस एवं प्रशासन की कड़ी निगरानी में एक बजे तक चला। उसके बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंप, 300 से अधिक सपाईयों ने गिरफ्तारी दी। एक-एक कर तीन बसों और पुलिस द्वारा लाए गए चार पहिया वाहनों से सपाईयों को पुलिस लाइन ले जाया गया। कुछ स्वयं की गाड़ियों से गए।


गुरुवार की सुबह 10.30 बजे से निगम परिसर में सपाईयों की भीड़ जुटने लगी थी। निर्वतमान जिला अध्यक्ष प्रह्लाद यादव की अध्यक्षता में धरना का संचालन निर्वतमान महानगर अध्यक्ष जिलाउल इस्लाम ने किया। धरना स्थल पर जोरदार नारेबाजी की जा रही थी। काफी संख्या में महिलाएं भी पहुंच रहीं थीं। 12 बजे के करीब संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार दलबल के साथ पहुंचे। कुछ देर बाद सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मिश्र भी ज्ञापन लेने के लिए पहुंच गए। अब तब निगम परिसर में सपाईयों से ज्यादा पुलिस बल ही दिखने लगा था। बढ़ी पुलिस के संख्या के साथ सपाईयों के नारे भी तेज होने लगे थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी परिसर से बाहर नहीं जाएगा, ज्ञापन देकर धरना खत्म करें। लेकिन सपाई गिरफ्तारी पर अड़े थे।

प्रदर्शन में निर्वतमान जिला अध्यक्ष एवं महानगर अध्यक्ष के अलावा मोहसिन खान, चंद्रबली यादव, अवधेश यादव, रामभुआल निषाद, रजनीश यादव, विजय बहादुर यादव, यशपाल रावत, जवाहर लाल मौर्या, सिंघासन यादव, प्रमोद यादव, साधू यादव, अमरेंद्र निषाद, फिरंगी प्रसाद, रुपावती बेलदार, मनुरोजन यादव, जफर अमीन ड्क्कू, मनोज यादव, रामजतन यादव, राघवेंद्र तिवारी राजू, रामनाथ यादव, मिर्जा कदीर बेग, श्याम देव निषाद, जवाहर यादव, पंकज शाही, सुशीला भारती, अशोक यादव, अखिलेश यादव, जितेंद्र यादव, गवीश दुबे, अशोक चौधरी, काली शंकर, नगीना प्रसाद साहनी, शहाब अंसारी, शकील अंसारी, राजकुमारी देवी, मनोज निषाद, दयानंद विद्रोही, चर्चिल अधिकारी, राजीव यादव, शब्बीर कुरैसी, संतोष गौड़, रमेश यादव, संजय यादव, नंदलाल कन्नौजिया, मुन्नी लाल यादव, दयाशंकर निषाद, चंद्रमणि यादव, मैना भाई, रविंद्र यादव, रामंगल यादव, अनूप यादव, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, सत्येंद्र गुप्ता, कीर्ति निधि पाण्डेय, विकास यादव, नावेद मलिक, उर्मिला देवी, अख्तर जहां, कुद्दूस अली, कपिल मुनि यादव, फहीम गुड्डू, सचिदानंद यादव, खरभान यादव, देवेंद्र भूषण निषाद, देवेंद्र सिंह, जयराम यादव, विक्रम यादव, मनमोहन यादव, अमन यादव, करुणानिधान, जय प्रकाश यादव, नमिता सिंह, इनामुल्लाह खा समेत काफी संख्या में सपाई उपस्थित रहे।


सपाईयों और पुलिस के बीच हुई झड़प
12.40 बजे के करीब सपाईयों और पुलिस के बीच हल्की झड़प हुई। दो सपा कार्यकर्ताओं को पुलिसकर्मियों ने भीड़ से खींच कर बस में डाल लिया। एक बारगी अफरा तफरी मची लेकिन प्रह्लाद यादव ने अपील कर सभी को एक बार फिर एकजुट किया। एक बार फिर धरना स्थल पर नारेबाजी होने लगी। 1.05 बजे सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मिश्रा और संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार ज्ञापन लेने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ सपाईयों के बीच पहुंचे। जैसे ही प्रह्लाद यादव एवं जिलाउल इस्लाम ने ज्ञापन सौंपा, पुलिस ने सपाईयों को परिसर में खड़ी तीन बसों में बिठाना शुरू कर दिया। कुछ संख्या में कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी से विरोध जताया जिस पर पुलिस से झड़प भी हुई।

‌”धर्म के आधार पर बाटने वाला बिल कतई बर्दाश्त नहीं: प्रह्लाद यादव”
प्रह्लाद यादव ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार समाज और जाति के आधार पर, धर्म के आधार पर लोगों को बांटने के लिए नागरिक संशोधन बिल लाई है जिसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। कहा कि सरकार की नीतियों से देश के लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है। मांग किया कि दुष्कर्म और हत्याओं के दोषियों को 30 दिन के भीतर दण्ड दिया जाए। ओलावृष्टि से किसानों को हुई क्षति की पूर्ति का प्रबंधन हो, गन्ना किसानों को पर्ची मुहैय्या कराने की मांग करते हुए गन्ना माफियाओं पर लगाम लगाने की मांग करते हुए गन्ना मूल्य का 450 रुपये प्रति कुंटल बढ़ोत्तरी की मांग की। 31 दिसंबर तक बकाया 5000 कुंतल गन्ना मूल्य भुगतान की मांग भी रखी। बंद चीनी मिलों को पूर्वांचल के जनपदों को तत्काल चालू कराने की व्यवस्था की जाए।


“किसान पर दर्ज मुकदमें-जुर्माने वापस हो: जिलाउल इस्लाम”
निर्वतमान महानगर अध्यक्ष जिलाउल इस्लाम ने कहा कि धान क्रय केंद्रों पर किसानों को शोषण हो रहा। बोरे तक उपलब्ध नहीं है। पराली जलाने कर किसानों पर फर्जी मुकदमें और जुर्माना लगा उत्पीड़न किया जा रहा है। आलू उत्पादकों के लागत से मुताबिक समर्थन मूल्य की अब तक घोषणा नहीं है, न ही आलू क्रय केंद्र की सूची प्रकाशित की गई है। बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी तत्काल वापस लेने की मांग की गई। बढ़ती महंगाई और छात्रों की फीस बढ़ोत्तरी वापस लेने की मांग की गई।

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