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कोरोनाः कुछ दिन आजाद रहेंगे बंदी, जानिए क्यों मिल जाएगी पेरोल

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  • स्क्रीनिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कमेटी बनाएगी सरकार
  • गोरखपुर जेल में बंद हैं क्षमता से अधिक 1714 बंदी

गोरखपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला ले लिया है। कोर्ट ने कहा है कि देशभर में मौजूद सभी जेलों में सजा काट रहे वे बंदी जिनकी सजा 7 साल से कम है उन्हें पैरोल दी जाए। कोर्ट ने बंदियों को 6 हफ्ते के लिए पैरोल देने का कहा है। कोर्ट द्वारा जारी किए गए इस फैसले से जेलों में मौजूद हजारों बंदियों को पैरोल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। गोरखपुर मंडलीय कारागार में निरूद्ध सात साल से कम सजा वाले कई बंदियों को कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पेरोल पर रिहाई मिल सकती है।


मंडलीय कारागार गोरखपुर में वर्तमान में कुल बंदियों की संख्या 1714 है। इनमें 167 कैदी शामिल हैं जिनको विभिन्न मामलों में सजा मिल चुकी है। इन बंदियों में कई बंदी सात साल से कम सजा वाले भी हैं। कोर्ट के आदेश को लेकर गोरखपुर जेल में भी पेरोल पर बंदियों को राहत देने की तैयारी शुरू हो गई।
हाई पॉवर कमेटी गठित करने के ये हैं आदेश
जेलों में क्षमता से अधिक बंदी और कोरोना वायरस का उनके स्वास्थ्य पर होने वाले संभावित संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने आदेश देते हुए कहा कि राज्य सरकारें इसे लेकर हाई पॉवर कमेटी का गठन करें। इस समिति में लॉ सेकेट्ररी, राज्य लीगल सर्विस अथोरिटी के चेयरमैन, जेल के डीजी को शामिल किया जाए। ये कमेटी तय करेगी कि 7 साल की सजा वाले मामलो में किन सजायाफ्ता दोषियो और अंडर ट्रायल कैदियों को पैरोल या अन्तरिम जमानत पर छोड़ा जा सकता है। बतादें कि कोर्ट ने इस मामले में स्वतः ही संज्ञान लिया है।


आदेश मिलने पर शुरू होगी कार्रवाई
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डा. रामधनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल पर बंदियों को छोड़े जाने का क्या आदेश दिया ह।ै इस संबंध में अभी तक उन तक कोई गाइड नहीं मिल सकी है। यदि कोई आदेश आया तो फैसला लिया जाएगा। बंदियों को कोरोना से बचाने के लिए रोजाना थर्मल स्केनिंग की जा रही है। बैरकों में साफ-सफाई के अलावा सेनेटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। बंदियों से उनके परिजनों की मुलाकात भी रोक दी गई है। जेल में बंदी मॉस्क सिल रहे हैं जिसका इस्तेमाल सभी कर रहे हैं।

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