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अब जो सोनिया हैं वो कभी राजेश थीं, जानिए कितनी दिलचस्प है लिंग परिवर्तन की कहानी

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गोरखपुर। (आशुतोष मिश्रा ) पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल स्थित चीफ मेकैनिकल वर्कशॉप में कार्यरत राजेश पांडेय अब पूरी तरह से सोनिया बन गए हैं। रेलवे ने भी उनको सोनिया मान लिया है। लिंग परिवर्तन कराकर राजेश से सोनिया के रूप में नई पहचान पा चुकी रेल कर्मचारी की दोस्ती सबको रास आ रही है। रेलवे में हेड क्वार्टर से लेकर वर्कशॉप तक में रोज एक बार लोगों की बातचीत में सोनिया का जिक्र जरूर होता है। हो भी क्यों ना, अपने आप में यह कहानी भी तो काफी दिलचस्प है।

अब गृहस्थी बसाने की तैयारी की तैयारी
लिंग परिवर्तन के बाद गोरखपुर मुख्यालय से नई पहचान मिलने पर सोनिया जल्द ही शादी करके अपनी गृहस्थी बसाना चाहती हैं। लड़की बनी सोनिया कभी अपने बच्चे को जन्म नहीं दे सकती हैं। इसकी जानकारी दिल्ली में सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें दे दी थी। अपनी लड़ाई में साथ देने वाले के साथ ही उनका विवाह होना भी निश्चित है। शादी के वह एक बच्चे को गोद लेंगी। लिंग बदलाव के नई पहचान पाना सोनिया के लिए आसान नहीं था। जो सोनिया है वही राजेश भी हैं। यह मानने को रेलवे अधिकारी कतई तैयार न थे। लेकिन सोनिया की भी अपनी ज़िद थी। उन्होंने ठान लिया था कि यह साबित करके दिखाएंगी कि वही सोनिया हैं जो पहले राजेश के रूप में नौकरी करती रही।

26 माह तक लड़ीं महिला होने की लड़ाई
इस चक्कर में महिला होने के अधिकार की लड़ाई 26 महीने तक लड़ती रहीं। तब जाकर मुख्य कारखाना प्रबंधक (कार्मिक ) ने 4 मार्च को रेलवे के अभिलेखों में लिंग और नाम परिवर्तन का आदेश जारी किया। मुख्य कारखाना प्रबंधक (कार्मिक) ने अपने आदेश में कहा है कि लिंग परिवर्तन कराने वाले राजेश कुमार पांडेय को मुख्य कार्मिक अधिकारी के निर्देश पर दो अगस्त एवं 10 अगस्त 2019 को मेडिकल जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक इज्जतनगर भेजा गया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने 6 सितंबर 2019 को पुरुष से महिला के रूप में सर्जरी से लिंग परिवर्तन की पुष्टि की। इस लिए राजेश पांडेय के आवेदन और मेडिकल जांच के आधार पर उनका नाम सोनिया पांडेय करने का निर्णय लिया गया है। उनके रेल सेवा अभिलेखों, मेडिकल कार्ड, परिचय पत्र आदि अभिलेखों में नाम बदल दिया गया है। महिलाओं वाले लक्षण होने पर राजेश ने लिंग बदलवाया।

पिता की जगह मिली जॉब, पत्नी से हुए अलग
सोनिया पांडेय बने राजेश के पिता रेलकर्मी थे, उनकी मृत्यु के बाद राजेश को 19 फरवरी 2013 में मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली।इज्जतनगर के मुख्य कारखाना प्रबंधक कार्यालय में कार्यरत तकनीकी ग्रेड-एक के पद पर तैनात राजेश की शादी 2012 में एक लड़की से हुई। शरीर में महिलाओं जैसे बदलाव होने पर परेशान राजेश ने लिंग परिवर्तन का फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने पत्नी को समझाया। फिर उससे अलग हो गए। 10 दिसंबर 2017 को राजेश ने सर्जरी कराकर अपना लिंग परिवर्तन करा लिया। इसके बाद उन्होंने रेलवे में नाम व लिंग बदलने का आवेदन किया। लेकिन रेल अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं थे कि सोनिया ही राजेश हैं।

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