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गोरखपुर यूनिवर्सिटी का प्रेमनाथ बनाता है फर्जी मार्कशीट

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– एसटीएफ गोरखपुर यूनिट ने किया पर्दाफाश, दो गिरफ्तार
– दे​वरिया में फर्जी मास्टर और डिग्री बनाने वालों की तलाश

गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग का चपरासी प्रेमनाथ फर्जी मार्कशीट बनाने के रैकेट से जुड़ा है। वह कई लोगों की फर्जी मार्कशीट बनवाकर नौकरी ​लगाने में मदद कर चुका है। नंबर बढ़ाकर चपरासी अंक पत्र ही जारी नहीं कराता। साथ ही साथ उसे विश्वविद्यालय के रिकार्ड में फर्जी तरीके से चढ़वा भी देता था। यह दावा एसटीएफ गोरखपुर यूनिट ने ​देवरिया में फर्जी मार्कशीट पर नौकरी कर रहे दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद किया है। एसटीएफ गोरखपुर यूनिट के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह ने बताया है कि पकड़े गए नथुनी प्रसाद भारती और शिव प्रसाद ने यह जानकारी दी है। फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

जांच में मिली जानकारी, एसटीएफ ने किया गिरफ्तार
सटीएफ को जानकारी मिली थी कि कुछ स्कूलों और कॉलेज में फर्जी मार्कशीट के सहारे लोग नौकरी कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने बताया था कि देवरिया जिले के खुखुदू थाना क्षेत्र स्थित शेरवा बभनौली निवासी नथुनी प्रसाद भारती फर्जी अंक पत्र के आधार पर भलुअनी के जमुना छापर प्राथमिक स्कूल में टीचर बनकर नौकरी कर रहा है। उसका बीए का अंक पत्र भी कूट रचित है। सूचना मिलने पर एसटीएफ ने बीएसए देवरिया आफिस और गोरखपुर विश्वविद्यालय से जांच कराया। तब जानकारी मिली कि वर्ष 1990 में बीए भाग एक रोल नंबर 37713 पर धर्मेन्द्र सिंह पुत्र श्री रामपरसन सिंह अंकित है जिसका परीक्षाफल अनुपस्थित, वर्ष 1991 में बीए भाग दो रोल नंबर 92667 पर मृत्युंजय मणि तिवारी पुत्र तारकेश्वर मणि तिवारी का नाम अंकित है। तथा परीक्षा फल अनुपस्थित वर्ष 1992 में बीए भाग तीन अनुक्रमां 82866 पर नत्थू प्रसाद जिसको काटकर नथुनी प्रसाद (पुत्र रामानन्द प्रसाद) अंकित किया गया है। मंगलवार को मुखबिर ने पुलिस को बताया कि नथुनी प्रसाद खुखुंदू चौराहे पर मौजूद है। एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया।

नौकरी पाने को बनाया अपना फर्जी मार्कशीट
पूछताछ में नथुनी ने बताया कि बीएड के आधार पर, विशिष्ट बीटीसी के जरिए जब प्राइमरी में भर्ती होने लगी तो मैंने बीएड किया। लेकिन मेरिट के आधार पर नियुक्ति हो रही थी। इसलिए उसने अपने रिश्तेदार शिव प्रसाद से संपर्क किया। मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में बड़े बाबू शिव प्रसाद ने इसका उपाय निकाला। बताया कि बीए की फर्जी मार्कशीट बन जाएगी। उनके कॉलेज के बाबू बिंदू प्रसाद पांडेय की मौत हो चुकी है। बिंदू पांडेय की मदद से शिव प्रसाद ने सादा मार्कशीट निकालकर उसमें मनमाफिक नंबर भरते हुए बीए एक, भाग दो और तीन का अंक पत्र बनवा लिया। मेरिट में नाम आने से प्राइमरी स्कूल में नौकरी मिल गई। एसटीएफ का कहना है कि शिव प्रसाद बड़े बाबू के पद पर तैनात रहते हुए साजिश करके सादा अंकपत्र निकलवाकर उस पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर उसे नौकरी में इस्तेमाल करता था। उससे मार्कशीट लेने वालों की तलाश एसटीएफ कर रही है। फर्जी शिक्षक नथुनी प्रसाद और मार्कशीट बनाने वाले शिव प्रसाद के पास से बाइक सहित कई सामान मिले हैं। इन दोनों ने प्रेमनाथ की मदद से फर्जी मार्कशीट बनवाकर कई लोगों को बेचा है।

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