यहां जेल में गीता प्रेस की पुस्तकों से बदल रही बंदियों की जिंदगी

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गोरखपुर। मंडलीय जेल में बंदियों को संस्कार सिखाने के लिए गीता प्रेस की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। रामायण और गीता सहित अन्य धार्मिक पुस्तकें हर माह बंदियों को पढ़ने के लिए दी जाती हैं। बंदियों में संस्कार भरने और उनको सही रास्ते पर ले आने के लिए जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इस कार्य में विभिन्न समाजसेवी संगठन भी मदद करते हैं। जेल अधिकारियों का मानना है इन किताबों को पढ़कर बन्दी अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं। इसलिए उन्हें समय-समय पर धार्मिक पुस्तक दी जाती हैं। इस बार भी कल्याण की 400 प्रतियां जेल में पहुंचाई गई हैं। सिविल जज प्रीति, प्रीति माला चतुर्वेदी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी, जेलर प्रेम सागर शुक्ला और विनोद कुमार ने 20 बंदियों के बीच इन पुस्तकों का वितरण किया। जेल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है इन किताबों को पढ़कर बंदियों के बीच में सकारात्मक भाव पैदा होता है। इनकी प्रेरणा से बंदी समाज को नई दिशा देने के लिए एक कदम आगे बढ़ा सकेंगे।

फोटो: गीता प्रेस की पुस्तक ग्रहण करते जेल अधिकारी।

यहां बता दें कि गीता प्रेस आम जनता को अपनी धार्मिक पुस्तकें 30 से लेकर 60 प्रतिशत तक कम दाम में उपलब्ध कराता है। वर्ष 1923 से यह सिलसिला चल रहा है। गोरखपुर में छपी गीता प्रेस की किताबें विदेशों में भी पढ़ी जाती हैं। पिछले तीन साल से गीता प्रेस की तरफ से धार्मिक किताबें मंडलीय जेल में भेजी जा रही हैं। इन पुस्तकों को पढ़ने वाले बंदियों के जीवन में तमाम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हत्या, लूट और रेप सहित कई अन्य गंभीर मामलों में बंद अभियुक्त उन किताबों को रुचि लेकर पढ़ते हैं। इससे उनका समय भी अच्छे से बीत जाता है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने बताया जेल में योग, धार्मिक किताबों के वितरण और खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन से काफी बदलाव नजर आने लगे हैं।

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